पूर्ण विवरण- क्या है भारत का स्मार्ट सिटी प्लान?

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Short Film Of Mission Smart City Patna
14/09/2016
Patna Municipal Corporation
21/09/2016
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[सुरेश कुमार तिवारी/वनइंडिया डेस्क] क्या आप किसी वैसे शहर की कल्पना कर सकते हैं, जिसकी सड़कों पर स्थित हर खम्भे पर कैमरे लगे हों, रात में पैदल यात्री के उपस्थित होने पर बल्ब स्वत: जल जाए अन्यथा डिम हो जाए, सूर्य की रोशनी के अनुरूप घरों की लाइटें घटाई बढ़ाई जा सकें और शिक्षक की गैर-हाजिरी पर किसी दूसरे स्कूल का शिक्षक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पढ़ा सके। जी हां, मोदी सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना इसी कल्पना को साकार करने वाली है।

Smart City Plan

प्रस्तुत है स्मार्ट सिटी परियोजना का पूर्ण विवरण। इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आपके जहन में तमाम सवाल आयेंगे। कुछ बातों पर हैरानी होगी, कुछ पर आप कहेंगे असंभव। दिमाग में जो कुछ भी आये- नीचे कमेंट में जरूर लिखियेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने शहरी भारत को रहन-सहन, परिवहन और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के इरादे से तीन महत्वाकांक्षी योजनाओं- स्मार्ट सिटीज, अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) और सभी को आवास योजना- का शुभारम्भ किया है। इन परियोजनाओं से देशवासियों की उम्मीदों को नयी उड़ानें मिलती नजर आ रही है और सपनों को संजीवनी।

क्या-क्या हैं स्मार्ट सिटी के मकसद

  • शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना
  • स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना
  • परिवहन व्यवस्था को बेहतरीन बनाना
  • शहरों की छवि खराब करती झुग्गी झोपड़ियों को हटाना
  • झुग्गी में रहने वाले लोगों को वैकल्पिक सुविधा मुहैया कराना
  • शहरी संसाधनों, स्रोतों और बुनियादी संरचनाओं का सक्षम ढंग से विकास करना
  • 2022 तक सभी को आवास उपलबध कराना

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की वर्तमान जनसंख्या की लगभग 31 प्रतिश आबादी शहरों में बसती है और इनका सकल घरेलू उत्पाद में 63 फीसदी का योगदान हैं। ऐसी उम्मीद है कि वर्ष 2030 तक भारत की आबादी का 40 फीसदी हिस्सा शहरों में रहेगा और सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान 75 प्रतिशत का होगा ।

इसके लिए भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। ये सभी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने एवं लोगों और निवेश को आकर्षित करने, विकास एवं प्रगति के एक बेहतर चक्र की स्थापना करने में महत्वपूर्ण हैं। स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है।

क्या-क्या है स्मार्ट सिटी मिशन में

  • इस मिशन में 100 शहरों को शामिल किया जाएगा। इसकी अवधि पांच साल (2015-16 से 2019-20) की होगी।
  • पांच साल पूरे होने पर मंत्रालय द्वारा मूल्यांकन किया जायेगा और तब तय किया जायेगा कि इस मिशन को कहां-कहां चलाया जाये।
  • 100 स्मार्ट शहरों की कुल संख्या एक समान मापदंड के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच वितरित किया गया है।
  • इस वितरण फार्मूला का इस्तेमाल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अमृत के तहत धनराशि के आवंटन के लिए भी किया गया है।
  • स्मार्ट सिटी मिशन एक केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित किया जाएगा।
  • पांच साल में 48,000 करोड़ रुपये, करीब प्रति वर्ष प्रति शहर 100 करोड़ रुपये औसत दिये जायेंगे।

सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के शहर

  • शहरी विकास मंत्रालय ने यह तय कर दिया है कि देश के किस राज्य से कितने शहर स्मार्ट सिटीज प्रोजेक्ट के लिए चुने जाएंगे।
  • स्मार्ट शहरों की सूची में सबसे ज्यादा 13 स्मार्ट सिटीज उत्तर प्रदेश में होंगी।
  • तमिलनाडु के 12 और महाराष्ट्र के 10 शहरों को स्मार्ट सिटीज के तौर पर विकसित किया जाएगा।
  • मध्य प्रदेश के 7 और गुजरात और कर्नाटक के छह-छह शहर स्मार्ट सिटी बनेंगे।

किस शहर का पहले लगेगा नंबर?

किस शहर का नंबर पहले लगेगा, ये इंटर-सिटी कंपिटिशन में शहरों के स्मार्ट सिटी प्लान पर निर्भर करेगा। इस साल के आखिर तक 20 शहरों को स्मार्ट सिटीज के लिए चुना जाएगा। बाकी 80 शहरों के चयन का काम 2017-18 तक पूरा कर लिया जाएगा। रैंकिंग में सबसे ऊपर आए 20 स्मार्ट सिटीज के बाद बाकी 80 शहरों को खुद के प्लान में सुधार का मौका दिया जाएगा।

काम शुरू होने के बाद कार्यों की समीक्षा समीक्षा मिशन के कार्यान्वयन के दो साल बाद की जाएगी। जिन राज्यों / शहरी स्थानीय निकायों का प्रदर्शन अच्छा होगा उन राज्यों को शेष संभावित स्मार्ट शहरों में से कुछ का पुनःआवंटन किया जायेगा। यानि जितना स्मार्ट स्टेट उतनी स्मार्ट सिटीज।

जो स्मार्ट सिटी नहीं उन्हें दिया जायेगा अमृत

100 स्मार्ट सिटीज के अलावा देश भर से अब तक 476 शहरों की पहचान अमृत योजना के लिए की गई है। ये सारे शहर कम से कम एक लाख की आबादी वाले होंगे। इन शहरों को बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मदद मिलेगी।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि व्यापक विकास भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को एकीकृत करके ही होता है। सरकार की कई क्षेत्रीय योजनाएँ इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए शामिल होती हैं, भले ही उनके रास्ते अलग हैं। शहरी योजनाओं के स्वरूप में बदलाव करके उन्हें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस शहर में तब्दील करने में अमृत और स्मार्ट सिटी मिशन एक-दूसरे के पूरक साबित होने वाले हैँ।

हर कोई चाहेगा वो स्मार्ट सिटी में रहे?

हर कोई चाहता है कि वे स्मार्ट सिटी के निवासी कहलाएं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक शहर आखिर स्मार्ट कब कहलाता है? इस सवाल का जवाब कुछ शब्दों में बांधा नहीं जा सकता, क्योंकि सरकार से लेकर इन योजनाओं पर काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियां और आम लोग सबका जवाब अलग-अलग होगा। हर शहर की अपनी संस्कृति और अपना चरित्र होता है। हर शहर की अपनी कुछ विशेषताएं होती हैं। कई शहर बसावट में ही काफी जटिल और दुर्गम होते हैं और कुछ शहर काफी सहज होते हैं।

स्मार्ट सिटी शब्द सुनते ही सबसे पहले जो तस्वीर उभरती है वह कुछ ऐसी होती है:

  • एक शहर जहां की जलवायु शुद्ध हो, लोग खुली हवा में सांस ले सकें।
  • बिजली-पानी की सप्लाई 24 घंटे सुचारू हो। बिजली कटौती कतई न हो।
  • दिनभर लोगों को ट्रैफिक में न जूझना पड़े, सार्वजनिक यातायात उपलब्ध हो जो विश्व स्तरीय हों।
  • बुनियादी सुविधाएं जैसे किसी चीज की बुकिंग, बिल जमा करना, आदि बेहद सुगम हो।
  • सड़कें, इमारतें, शापिंग माल, सिनेप्लैक्स सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से बने हों।
  • अनाधिकृत कालोनियों की सड़ांध मारती गलियां न हों। झुग्गी-बस्तियां न हों।
  • कुछ ऐसा शहर दिखे जहां लोगों के रहन-सहन में समानता दिखे।
  • सड़कों पर कूड़ा-करकट कतई न दिखे। सड़कें एकदम साफ हों।
  • स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, आदि अत्याधुनिक सुविधओं से लैस हों।
  • शहर में बिजली के ग्रिड से लेकर सीवर पाइप सब कुछ अच्छे नेटवर्क में हों।
  • सड़कें, कारें और इमारतें हर चीज़ एक एक नेटवर्क से जुड़ी हों।
  • इमारत अपने आप बिजली बंद करें, स्वचालित कारें खुद अपने लिए पार्किंग ढूंढें।
  • शहर ऐसा जिसका कूड़ादान भी स्मार्ट हो।
  • गैस सिलेंडर के लिये लाइन लगने के बजाये, पाइपलाइन घर तक आये।
  • ऐसी व्यवस्था हो जिससे अपराध कम हों और लोग चैन से रह सकें।

क्या हैं चुनौतियां

  • भारत के तमाम शहर ऐसे हैं जिनकी सही मैपिंग तक उपलब्ध नहीं है।
  • तमाम शहरों में अवैध कब्जों की भरमार है। सीवर लाइनें बेतरतीब बिछी हैं।
  • शहरों का बेतरतीब निर्माण हो चुका है।
  • ज्यादातर शहरों के लोग सड़क पर कूड़ा फेंकने के आदि हो चुके हैं।
  • तमाम शहरों के लोग कटिया डालकर बिजली चलाने में निपुण हैं।
  • ज्यादातर शहरों के इलाके गलियों में बसे हैं, उन्हें कैसे स्मार्ट बनाया जाये?
  • अध‍िकांश शहरों में लोग ट्रैफिक लाइट का पालन नहीं करते। क्या स्मार्ट बनने के बाद करेंगे?
  • यूपी, एमपी, बिहार में बिजली की बहुत कमी है। शहर तो तब स्मार्ट होगा जब बिजली होगी?
  • शहर स्मार्ट बन गया तो हर इमारत, बिजली के खंभे और पाइप पर लगे सेंसरों पर कौन निगरानी रखेगा?
  • हर व्यवस्था को बेहतरीन ढंग से चलाने के लिये यंत्रों को कौन नियंत्रित करेगा?

कैसी होगी 2050 की दुनिया?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि शहरों को स्मार्ट बनने की ज़रूरत है। एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करेगी, जिससे यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर ज़बर्दस्त दबाव होगा।

सच्चाई यह है कि दुनियाभर में इस समय जो स्मार्ट शहर बन रहे हैं वे बहुत छोटे हैं। इन शहरों के बारे में काफी चर्चा हो रही है लेकिन उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे वास्तव में लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। हालांकि अगले पांच सालों में चीजें स्मार्ट हो जाएंगी, तब उन शहर का डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनों और सड़कों की तरह अहम हो जाएगा।

ऐसा नहीं कि भारत स्मार्ट सिटी की ओर अग्रसर होने वाला पहला देश है, इससे पहले से कई देशों में स्मार्ट सिटी परियोजनाएं बेहतरीन तरीके से क्रियान्वित की जा चुकी हैं। भारत में भी यदि इसे संजीदगी से अमल किया जाए तो इसे मोदी सरकार की बेहतरीन पहल कही जा सकती है, बशर्ते सरकार सामंजस्य बिठाने के लिए गांवों को भी स्मार्ट बनाने का प्रयास करे।

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